करवा चौथ पर महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती, बादलों में छिपा चांद तो कैसे खुलेगा व्रत?
चांद के दीदार का इंतजार, आसमान में बादलों ने बढ़ाई चिंता; चंद्र दर्शन न होने पर क्या हो सकता है विकल्प?
रिपोर्ट:मोहित प्रधान!
करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलती हैं। लेकिन इस बार आसमान में बादलों की आवाजाही और चंद्र दर्शन को लेकर बनी अनिश्चितता ने व्रत रखने वाली महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
महिलाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि यदि बादलों के कारण चांद दिखाई नहीं दिया तो व्रत कैसे खोला जाएगा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। ऐसी स्थिति में महिलाएं स्थानीय मंदिर के पुजारी या विद्वान से सलाह लेकर पूजा-विधि पूरी कर सकती हैं। कुछ परंपराओं में चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देने अथवा चंद्रमा का प्रतीकात्मक दर्शन करने की मान्यता भी प्रचलित है।हालांकि, इसका कोई एक सर्वमान्य विकल्प नहीं है। ऐसे में महिलाओं को घबराने के बजाय अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।


