हरिद्वार में 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन का शुभारंभ, राज्यपाल ने किया उद्घाटन

भारतीय ज्ञान-परंपरा मानव कल्याण और सामाजिक समरसता का आधार: राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन
रिपोर्ट ; मोहित प्रधान
हरिद्वार, 29 अक्टूबर। हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में गुरुवार को 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन का शुभारंभ राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शोधकर्ता, शिक्षाविद और विद्यार्थी भारतीय ज्ञान-परंपरा, प्राचीन ग्रंथों तथा दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परंपरा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण को बढ़ावा देना भी है। प्राच्यविद्या का अध्ययन भारतीय सभ्यता के विकास, विभिन्न विचारधाराओं के संवाद और मानव समाज के बौद्धिक इतिहास को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भारतीय दर्शन के ग्रंथों में जीवन मूल्यों, नैतिकता, कर्तव्य तथा सामाजिक समरसता से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश निहित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन ज्ञान परंपरा और भारतीय भाषाओं के संरक्षण को महत्व दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषाओं और अनुसंधान को प्रोत्साहित करती है।
राज्यपाल ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और अंकीयकरण के लिए चलाए जा रहे ज्ञान भारतम् मिशन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन पांडुलिपियों में भारत की अमूल्य बौद्धिक विरासत समाहित है। युवा शोधार्थियों को मूल ग्रंथों, ऐतिहासिक संदर्भों और दार्शनिक विचारों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए। शोध में प्रामाणिकता, पारदर्शिता और बौद्धिक ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान को लोककल्याण से जोड़ने की भावना रही है। वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच सह-अस्तित्व, संतुलन और मानव कल्याण के भारतीय विचार विशेष रूप से प्रासंगिक हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया।
कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित अनेक विद्वान, आचार्य और शोधार्थी उपस्थित रहे।


