कौर यूनिवर्सिटी में ‘सनातन मंथन’ संत सम्मेलन: आध्यात्मिक शिक्षा, संस्कारों पर हुआ मंथन
अनिल कश्यप
रुड़की। कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित “सनातन मंथन” संत सम्मेलन में आध्यात्मिक शिक्षा और संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे संतों और महामंडलेश्वरों ने अपने विचार रखते हुए आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर जोर दिया और विश्वविद्यालय प्रबंधन के इस आयोजन की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता निरंजनी अखाड़े के महासचिव महामंडलेश्वर रामरतन गिरी महाराज ने की, जबकि संचालन वेद वर्धन कवि द्वारा किया गया। संत सम्मेलन में वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़े रहें।
महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है। उन्होंने माता-पिता के सम्मान और आशीर्वाद को जीवन में सफलता का मूल बताया तथा आयुर्वेद अपनाने की सलाह दी। प्रयागराज से पहुंचे महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी ने कहा कि युवा वर्ग सोशल मीडिया में समय बिताने के बजाय गीता और वेद जैसे ग्रंथों का अध्ययन करें।
महंत सरिता गिरी ने शिक्षा को सनातन धर्म का प्रथम पाठ बताते हुए सरकार से स्कूलों और कॉलेजों में सनातन परंपराओं को बढ़ावा देने की मांग की। वहीं महामंडलेश्वर वैराग्यानंद महाराज ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान का वास्तविक स्रोत हमारे धार्मिक ग्रंथ हैं, न कि केवल सोशल मीडिया।
महामंडलेश्वर आदि योगी महाराज ने भगवान शिव के त्रिशूल की वैज्ञानिक व्याख्या कर श्रोताओं को प्रभावित किया। राष्ट्रीय संत दर्शन भारती जी ने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपनी संस्कृति की रक्षा करने का आह्वान किया। चेतना ज्योति आश्रम से आए शुभम महंत ने जीवन मूल्यों को अपनाने पर बल दिया।
इस दौरान साध्वी निहारिका, महामंडलेश्वर रामानंद सरस्वती, मोहनानंद गिरी, हरिचेतना नंद सहित कई संतों ने भी अपने विचार व्यक्त कर छात्रों में नई ऊर्जा का संचार किया।
कार्यक्रम के अंत में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जेसी जैन और वाइस चेयरमैन श्रेयांश जैन ने सभी संतों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, महंतगण और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



