उत्तराखंड की धरती पर समाप्त हुआ आतंक का एक अध्याय 29 साल में 57 मुकदमे के बाद कुख्यात विनय त्यागी की जीवन लीला हुई समाप्त

रिपोर्ट रजनीश सैनी
जनहित इंडिया
उत्तराखंड की धरती पर समाप्त हुआ आतंक का एक काला अध्याय । उत्तराखंड, यूपी , और दिल्ली जैसे 3 राज्यों के अनेकों जिलों लगभग 57 मुकदमे दर्ज है। सन 1996 में जीजा और साले के कत्ल में नाम आने पर हुई थी जुर्म कि दुनिया मे एंट्री ।
मूल रूप से यूपी के मुजफ्फरनगर के खाईखेड़ी गांव का रहने वाला गैंगस्टर विनय त्यागी उर्फ टिंकू पर यूपी और दिल्ली ओर उत्तराखंड के विभिन्न थानों में लगभग 60 मुकदमे दर्ज थे। आरोपी का मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा और देहरादून में प्रॉपर्टी के विवादित मामलों में भी नाम आता था। सियासत के मैदान में उतरने की ख्वाहिश भी रखता था कुख्यात बदमाश। अपनी पत्नी को भी दो बार अपनी दबंगई से पुरकाजी ब्लॉक से प्रमुख बनवाया चुका था। सहारनपुर की देवबंद सीट से खुद भी विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन सफलता नहीं मिली थी । एक समय तो अपने राजनैतिक कनेक्शन के चलते पश्चिमी उप्र में जमकर आतंक मचाया चुका था। कुख्यात के पिता मेरठ में नौकरी करते थे। वहीं पर विनय त्यागी की पढ़ाई भी हुई। अपराध की राह पकड़ी तो साल 1996 में खाईखेड़ी में प्रेम-प्रसंग को लेकर हुए विवाद के बाद संदीप उर्फ टोनी और उसके बहनोई गाजियाबाद के पिलखुआ निवासी प्रदीप की हत्या में नाम आया था। मुजफ्फरनगर में छपार, पुरकाजी, नई मंडी थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं। अक्तूबर 2025 माह में ही देहरादून पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज भी किया था ।


