अवैध निर्माण पर सूचना आयोग का डंडा, सिडकुल अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना

– करोड़ों की जमीन पर कब्जे को लेकर सिडकुल पर गिरी आयोग की गाज
– सूचना आयोग ने दिखाई सख्ती, अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी आदेश
– सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण, विभागों की मिलीभगत पर उठे सवाल
– पारदर्शिता से मुंह मोड़ने पर सिडकुल की खिंचाई, एसडीएम को सौंपी रिपोर्ट की जिम्मेदारी
रिपोर्ट: गौरव कुमार
हरिद्वार। हिल बायपास मार्ग स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में करोड़ों रुपये की भूमि पर अवैध निर्माण और स्वामित्व विवाद को लेकर उत्तराखंड सूचना आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी छिपाने और आदेशों की अवहेलना करने पर सिडकुल के लोक सूचना अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही विभागाध्यक्ष को जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का निर्देश भी दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता अजीत सिंह चौहान ने हिल बायपास रोड पर 12 व्यावसायिक निर्माणों के स्वीकृत मानचित्र, विकास शुल्क और भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी। लेकिन सिडकुल की ओर से उन्हें लगातार गुमराह किया गया और सही सूचना नहीं दी गई। आयोग ने सुनवाई के दौरान बार-बार स्पष्ट सूचना और स्थल निरीक्षण के निर्देश दिए, मगर सिडकुल अधिकारियों ने न तो सूचना उपलब्ध कराई और न ही आयोग में रिपोर्ट पेश की। आयोग ने इस रवैये को आदेश की खुली अवहेलना मानते हुए जुर्माने की कार्रवाई की है। सूचना आयोग ने एसडीएम हरिद्वार को भी भूमि स्वामित्व और संबंधित विभागों की स्थिति स्पष्ट करने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है। रिपोर्ट में सामने आया कि विवादित भूमि सिडकुल हरिद्वार के अधिकार क्षेत्र में आती है। यह जमीन पहले यूपीएसआईडीसी, भारत सरकार, उत्तर रेलवे और पीडब्ल्यूडी के नाम दर्ज थी।आयोग ने टिप्पणी की कि करोड़ों की सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण के मामलों में सूचना छिपाना विभागीय लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। जब सरकारी एजेंसियां ही पारदर्शिता से मुंह मोड़ लें, तो अवैध कब्जे और निर्माण को बढ़ावा मिलता है। एसडीएम ने आयोग से 15 दिन का समय मांगा है ताकि संबंधित विभागों से रिकॉर्ड एकत्र कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।


