दिल्ली के वज़ीरपुर में बुलडोज़र कार्रवाई के पीछे का सच,,,,
बनी राष्ट्रीय बहस,
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
रिपोर्ट: दिशा शर्मा
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उत्तर-पश्चिम दिल्ली के वज़ीरपुर इलाके में रेलवे भूमि पर वर्षों से बसी अवैध झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई ने देशभर में बहस छेड़ दी है। यह इलाका लंबे समय से रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था, जहाँ से गुजरने वाली ट्रेनों पर पत्थरबाज़ी, रेलवे संपत्ति की चोरी और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वज़ीरपुर ट्रैक के आसपास की बस्तियों से बीते एक दशक में दर्जनों बार ट्रेनों पर पथराव की घटनाएँ रिपोर्ट की गईं। कई मामलों में यात्री घायल हुए, जबकि कुछ ट्रेनों के शीशे भी टूटे।रेलवे पुलिस (RPF) का कहना है कि इन घटनाओं में अक्सर नाबालिगों का इस्तेमाल किया गया, ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
*नाबालिगों को आगे करने के आरोप*
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सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि स्थानीय स्तर पर संगठित तरीके से बच्चों को अपराध में धकेला गया। हालांकि, इस संबंध में मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बच्चों को अपराध के लिए इस्तेमाल किया जाना अपने आप में एक सामाजिक विफलता है, जिसकी ज़िम्मेदारी केवल बस्तियों पर नहीं डाली जा सकती।
*घुसपैठ का मुद्दा भी उठा*
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कार्रवाई के बाद कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने दावा किया कि इन इलाकों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की मौजूदगी भी सुरक्षा चिंता का विषय रही है। प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में सत्यापन की प्रक्रिया अलग से चल रही है और किसी भी समुदाय को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना उचित नहीं है।
*बुलडोज़र कार्रवाई और प्रशासन का पक्ष*
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दिल्ली प्रशासन और रेलवे विभाग ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया, नोटिस और न्यायालयीय दिशा-निर्देशों के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे भूमि पर अतिक्रमण से न केवल ट्रेनों की रफ्तार प्रभावित हो रही थी, बल्कि यात्रियों की जान भी खतरे में थी।



