

देवभूमि अस्पताल फिर बना ‘मौत का अड्डा’,
प्रसूता की संदिग्ध हालात में मौत से मचा हड़कंप।
रिपोर्ट:अरुण कश्यप!

हरिद्वार। एक बार फिर हरिद्वार का न्यू देवभूमि अस्पताल चर्चाओं में है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में एक 22 वर्षीय प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिससे परिजनों में गुस्सा और रोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत भोगपुर निवासी 22 वर्षीय महिला पूरी तरह स्वस्थ थी और प्रसव पीड़ा होने पर उसे जिला महिला अस्पताल, हरिद्वार में भर्ती कराया गया। वहां के डॉक्टरों ने उसे “हायर सेंटर” रेफर कर दिया, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर उसकी हालत इतनी गंभीर कब और कैसे हुई? सूत्रों के मुताबिक, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों के बीच मिलीभगत के चलते कई प्रसूताओं को जानबूझकर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है।
इसी दौरान अस्पताल में मौजूद एक आशा कार्यकर्ता ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और प्रसूता को न्यू देवभूमि अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि वहां डॉक्टरों ने पहले ₹40,000 की मांग की, जो कुछ समय बाद बढ़ाकर ₹65,000 कर दी गई। पैसे की व्यवस्था के बीच ही ऑपरेशन किया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में प्रसूता की मौत हो गई।
घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की, लेकिन सभी डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गए। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और बिना परिजनों की अनुमति के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम जल्द भेजी गई। सवाल यह है कि आखिर न्यू देवभूमि अस्पताल में बार-बार ऐसे हादसे क्यों हो रहे हैं और कब तक प्रसूताओं की जान से यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा?



