ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर भ्रष्टाचार का साया।
बहादराबाद क्षेत्र बना गढ़।
जनप्रतिनिधि–अभियंता अधिकारियों की मिलीभगत से जनता का धन बर्बाद।
रिपोर्ट: अरुण कश्यप।
हरिद्वार। ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर भ्रष्टाचार की मोटी परत चढ़ी दिखाई दे रही है। विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसका वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा।जानकारी के अनुसार, ब्लॉक बहादराबाद में सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों के नाम पर भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया जाता है। कागजों में तो योजनाएँ पूरी दिखाई जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों, विभागीय अभियंताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से विकास कार्यों में बंदरबांट की परिपाटी चल रही है।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल आम बात हो गई है। कई जगह तो सड़कें बनने के कुछ ही महीनों में टूट-फूट जाती हैं। वहीं, कुछ परियोजनाओं को कागजों पर ही पूरा दिखाकर धनराशि का गबन कर लिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो तो करोड़ों के घोटाले सामने आ सकते हैं।
विकासखंड बहादराबाद ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य पंचायतों में भी स्थिति कमोबेश यही है। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे रहते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर जनता का खून-पसीने का पैसा कब तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहेगा।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पंचायतों के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएँ। तभी पंचायतों में विकास की वास्तविक गंगा बह सकेगी।
एक एडीओ और एक अभियंता की भूमिका भी संदिग्ध
पिछले लंबे समय से एक ही सीट पर जमे एक एडीओ पंचायत व एक अभियंता की भूमिका भी सबसे ज्यादा संदिग्ध है ,
दोनों ने अब तक करोड़ों रुपए की बंदरबांट कर जनता की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाया है



