अब विद्युत शवदाह गृह की झूठी अफवाह फैलाकर करा रहे अपनी फजीहत।
रिपोर्ट :दिशा शर्मा
हरिद्वार। पिछले कुछ समय से मीडिया की सुर्खिया बने अजीतपुर के श्मशान घाट निर्माण में अब नया मोड आया है, जिसमें ग्राम प्रधान फिर से पलटी मारते दिखाई दिए,
मीडिया ने खुलासा किया था कि किस तरह से ग्राम प्रधान ने कोर्ट में शपथपत्र देकर और एनजीटी के गलत नियमों को आधार बनाकर श्मशान घाट निर्माण कार्य को रुकवा दिया था। किंतु दैनिक आज के खुलासे के बाद हुई अपनी किरकिरी होते देख ग्राम प्रधान फिर से एक पत्र जिलाधिकारी कार्यालय में दे आए, केवल यही नहीं बल्कि उसे खुद जमकर सोशल मीडिया पर वायरल भी किया।
हालांकि ग्राम प्रधान की ये करतूत सभी की समझ से परे है
केवल दिए गए पत्रों को ही ध्यान से पढ़ें तो ये ग्राम प्रधान कोई आम आदमी भी समझ सकता है कि ग्राम प्रधान किस तरह से भोले भाले ग्रामीणों को बेवकूफ बना रहे हैं,
ये बात सभी की समझ से परे है कि आखिरी विद्युत शवदाह गृह की झूठी कहानी ग्राम प्रधान क्यों गढ़ रहे हैं ,जबकि नमामि गंगे योजना के तहत यहां कोई भी विद्युत शवदाह गृह बनाने का कोई प्रस्ताव भी दूर दूर तक नहीं है,नमामि गंगे केवल टीन शेड डालकर यहां शमशान घाट बनाना चाहती है,ताकि बरसात के मौसम में भी अंत्येष्टि की जा सके।
नमामि गंगे के अधिकारी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधान ने कोर्ट में शपथपत्र देकर श्मशान घाट का निर्माण कार्य रुकवाया था, जिसे अब शुरू करना मुश्किल हो रहा है,
हम लोग कोई विद्युत शव दाह ग्रह नहीं बना रहे हैं
मैं तो यह सोचकर हैरान हूं कि यह विद्युत शवदाह ग्रह की बात आखिर कहां से उत्पन्न हुई , जरूर कोई भ्रमित कर रहा है ज़
क्योंकि हमने तो किसी को नहीं बताया। और 7 लाख जैसी छोटी रकम में कोई विद्युत शव दाह ग्रह कैसे बन सकता है ,
अंकुर सिंह
परियोजना प्रबंधक ,वैपकोस
गांव के युवाओ की पहल के बाद अब प्रशासनिक अधिकारी भी ग्रामीणों की समस्या का संज्ञान ले रहे हैं लेकिन कोर्ट में शपथपत्र देकर श्मशान घाट निर्माण कार्य रुकवाया जाना गलत है,
मनोज कश्यप
ग्रामीण युवा अजीतपुर



