तो क्या अब बेरोजगार संघ के पीछे छुपा है विपक्ष,
धामी सरकार के खिलाफ छेड़ी साजिश का पर्दाफाश।
रिपोर्ट:अरुण कश्यप!
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा खेल सामने आ रहा है। प्रदेश में स्थाई और मजबूत सरकार चला रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ विपक्ष ने अब नया हथियार खोज लिया है – बेरोजगार संघ और विरोधी मानसिकता रखने वाले युवा,असल में यह आंदोलन बेरोजगारों का नहीं, बल्कि विपक्ष के लिए संजीवनी बूटी है।
धामी सरकार ने अब तक प्रदेश के हित में कई बड़े, कठोर और जोखिम भरे फैसले लिए, जिसने मुख्यमंत्री को जनता के बीच लोकप्रिय और मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। यही कारण है कि विपक्ष लगभग विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया है। जो थोड़े बहुत विपक्षी नेता बचे हैं, वे अपने अवैध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में उलझे हुए हैं, इसलिए सीधे सरकार का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
ऐसी स्थिति में बेरोजगार संघ का आंदोलन विपक्ष की छुपी चाल का हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया पर जिस तरह से यह कैंपेन चलाया जा रहा है, उसमें विपक्षी नेताओं की अप्रत्याशित और गुप्त मौजूदगी साफ नज़र आ रही है। हर दिन फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार विरोधी पोस्ट को वायरल करने के लिए लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यहां तक कि इन पोस्ट को फैलाने के लिए महंगे स्पेस परचेज किए जा रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जो लोग खुद को बेरोजगार बताकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, उनके पास इतनी भारी-भरकम रकम कहां से आ रही है? जवाब साफ है – यह पैसा विपक्षी नेताओं की जेब से निकल रहा है। सीधे सरकार का विरोध करने में असमर्थ विपक्ष अब बेरोजगार संघ के पीछे छिपकर सरकार की छवि धूमिल करने की घिनौनी कोशिश कर रहा है।
पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश की जनता जिस विकास को महसूस कर रही है, उससे घबराया विपक्ष अराजकता फैलाने की साजिश रच रहा है। लेकिन जनता सब समझ रही है। यह आंदोलन बेरोजगारों की आवाज़ नहीं, बल्कि सत्ता खो चुके नेताओं की हताशा और बौखलाहट का परिणाम है। धामी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह ऐसे प्रपंचों से न तो डरेगी और न ही अपने विकास के एजेंडे से पीछे हटेगी।



