जगजीतपुर के शराब कारोबारियों पर आखिर कब तक मेहरबान रहेगा
हरिद्वार का नगर निगम
आठ साल में नहीं हट सका शराब का ठेका, RTI से हुआ था बड़ा खुलासा
रिपोर्ट: अरुण कश्यप |
हरिद्वार । देश-विदेश में आध्यात्मिक नगरी के रूप में विख्यात हरिद्वार का नगर निगम शराब कारोबारियों पर नरमी बरतने के आरोपों में घिर गया है। आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत सामने आई जानकारी ने यह साफ कर दिया है कि निगम प्रशासन की सुस्ती और उदासीनता के चलते पिछले आठ वर्षों में न तो जगजीतपुर क्षेत्र से शराब का ठेका हटाया जा सका और न ही बोर्ड बैठक में पारित प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई हुई।नगर निगम की 19 जुलाई 2023 को हुई बोर्ड बैठक में बिंदु संख्या 49 के अंतर्गत जगजीतपुर-देवपुरा क्षेत्र में संचालित शराब की दुकानों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बावजूद एक वर्ष बीतने के बाद भी नगर निगम ने इस पर शून्य कार्रवाई की है। यह बात खुद नगर निगम ने पत्रांक संख्या 272 के माध्यम से आरटीआई के उत्तर में स्वीकार की है।जगजीतपुर क्षेत्र को आठ वर्ष पूर्व नगर निगम में शामिल किया गया था, जो कि निगम के शराब व मांस निषेध क्षेत्र में आता है। लेकिन इसके बावजूद यहां आज भी शराब की दुकान संचालित हो रही है, जो कि धार्मिक मान्यताओं और नियमों दोनों का उल्लंघन है।
स्थानीय समाजसेवी आशीष गॉड और निवर्तमान पार्षद मनोज परालिया ने इस मुद्दे पर नगर निगम की निष्क्रियता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह ठेका घनी आबादी और स्कूलों के बीच स्थित है, जिससे बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
हरिद्वार जैसे धार्मिक नगर में शराब की दुकान को हटाने के लिए आठ साल भी नाकाफी साबित हुए हैं। नगर निगम की उदासीनता और निर्णयहीनता ने इसे एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही में तब्दील कर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम धार्मिक आस्थाओं और जनहित को तरजीह देगा या शराब माफिया की मेहरबानी यूं ही चलती रहेगी?



