आरई वॉल पेंटिंग ठेके पर सवाल, तकनीकी निविदा सार्वजनिक होने से पहले साइट पर काम शुरू होने का आरोप।

19 अक्टूबर शाम 4:30 बजे तक पोर्टल पर तकनीकी परिणाम उपलब्ध न होने का दावा; वित्तीय बोली, कार्य आवंटन और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
रिपोर्ट: अरुण कश्यप।
हरिद्वार। आरई वॉल थीम पेंटिंग के ठेके को लेकर निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि तकनीकी निविदा का परिणाम पोर्टल पर सार्वजनिक किए जाने से पहले ही हरिद्वार साइट पर कार्य शुरू हो गया। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय बोली की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी हुई तथा काम कर रही फर्म को कार्य किस प्रक्रिया के तहत आवंटित किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस निविदा प्रक्रिया में कुल नौ कंपनियों ने भाग लिया था। दावा है कि 19 अक्टूबर 2026 को शाम 4:30 बजे तक तकनीकी निविदा/तकनीकी मूल्यांकन का परिणाम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं था, जबकि साइट पर कार्य शुरू होने की जानकारी सामने आ चुकी थी।
तकनीकी परिणाम सार्वजनिक नहीं, फिर साइट पर काम कैसे शुरू हुआ?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठाया जा रहा है कि यदि तकनीकी मूल्यांकन का परिणाम पोर्टल पर सार्वजनिक नहीं हुआ था, तो वित्तीय बोली खोलने, सफल बोलीदाता तय करने और कार्य आवंटित करने की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई गई।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि तकनीकी निविदा खोले जाने की तारीख और समय, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट, पात्र एवं अपात्र बोलीदाताओं की सूची, वित्तीय बोली खोलने का रिकॉर्ड, सक्षम अधिकारी की स्वीकृति तथा कार्य आवंटन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
काम कर रही फर्म की वित्तीय पात्रता पर भी सवाल
शिकायत में ये काम कर रही फर्म का वार्षिक कारोबार करीब 15 से 20 लाख रुपये होने का दावा किया गया है, जबकि निविदा की पात्रता शर्तों में करीब पांच करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार की आवश्यकता होने की बात कही गई है।
इसी आधार पर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि उक्त आंकड़े सही हैं, तो फर्म को तकनीकी एवं वित्तीय रूप से किस आधार पर पात्र माना गया। कंपनी द्वारा प्रस्तुत टर्नओवर प्रमाणपत्र, बिड कैपेसिटी, अनुभव और अन्य पात्रता दस्तावेजों के सत्यापन की मांग भी की गई है।
मामले की अधिक जानकारी के लिए एनएचआईटी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (टेक्नीकनल) अर्पण घोष से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी और बाद में फोन बंद मिला।
वहीं,
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि केवल कार्य आवंटन ही नहीं, बल्कि टेंडर प्रकाशित होने से लेकर तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बोली, सफल बोलीदाता के चयन, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति, कार्य आवंटन और साइट पर काम शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि पोर्टल पर तकनीकी परिणाम उपलब्ध न होने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि तकनीकी मूल्यांकन हुआ ही नहीं था। आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि निविदा प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी हुई या इसमें किसी स्तर पर अनियमितता हुई।


