अवैध कॉलोनियों के लालच में पर्यावरण पर प्रहार,
जियापोता में केमिकल डालकर सुखाए गए हरे-भरे आम के बाग।
रिपोर्ट: रिपोर्ट दिशा शर्मा
हरिद्वार।अवैध निर्माण और कॉलोनाइजरों के मुनाफे की होड़ ने हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के पर्यावरण को गहरी चोट पहुंचाई है। मिस्रपुर से जियापोता तक जमीनों के दाम आसमान छूने लगे हैं और इसी लालच में हरे-भरे खेतों व फलदार आम के बागों को उजाड़कर महंगी कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। कभी अपने घने आम के बागों के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब भू-माफियाओं की जिद्दी नजर के चलते सैकड़ों अवैध कॉलोनियां खड़ी हो चुकी हैं।
ताजा मामला हरिद्वार–रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) के बोर्ड के समीप जियापोता क्षेत्र का है, जहां एक हरे-भरे आम के बाग को उजाड़ने के लिए कथित तौर पर केमिकल डाल दिया गया। इसके परिणामस्वरूप आधे से अधिक आम के पेड़ सूख चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि अब इन्हीं सूखे फलदार पेड़ों के कटान की अनुमति विभाग से मांगी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में कोई नई बात नहीं हैं। पहले पेड़ों में केमिकल डालकर उन्हें सुखाया जाता है और फिर उन्हें गैर-फलदार बताकर कटान की अनुमति ले ली जाती है, ताकि जमीन को प्लॉटिंग के लिए साफ किया जा सके। बाग स्वामी जुगल किशोर ने बताया कि पेड़ों के सूखने का कारण ओलावृष्टि बताया जा रहा है, जो पूरी तरह से झूठ है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि पूरे क्षेत्र में हुई थी, लेकिन आसपास के सभी बाग आज भी हरे-भरे हैं, जबकि सिर्फ इसी बाग के पेड़ सूखे हैं।
यह मामला केवल पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़ा करता है जिले में फलदार पेड़ों के संरक्षण के लिए नियम-कानून बने हुए हैं, बावजूद इसके इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।अब देखना यह होगा कि हरित संरक्षण के लिए जिम्मेदार जिला उद्यान विभाग इस हरे-भरे आम के बाग को बचाने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर यह बाग भी भूमाफियाओं की भेंट चढ़कर हमेशा के लिए इतिहास बन जाएगा,,,



