गंगा किनारे अवैध निर्माणों पर एचआरडीए की निगरानी पर सवाल।

श्यामपुर, गाजीवाली, कनखल, अजीतपुर और बिशनपुर में निर्माणों की जांच की मांग; गंगा के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंधित होने के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल
रिपोर्ट: मोहित प्रधान।
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा किनारे कथित अवैध निर्माणों को लेकर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। श्यामपुर, गाजीवाली, कनखल, अजीतपुर और बिशनपुर सहित गंगा तटीय क्षेत्रों में डूब क्षेत्र के भीतर निर्माण होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर इन निर्माणों की निगरानी कौन कर रहा है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?गंगा के बाढ़ क्षेत्र में निर्माण को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान हैं। केंद्र सरकार के 7 अक्टूबर 2016 के River Ganga (Rejuvenation, Protection and Management) Authorities Order, 2016 के तहत गंगा के तट और बाढ़ क्षेत्र को निर्माण मुक्त रखने का प्रावधान है। वहीं, एनजीटी ने मूल वाद संख्या 200/2014, एमसी मेहता बनाम भारत संघ मामले में 13 जुलाई 2017 के आदेश के तहत बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन तक नदी के किनारे से 100 मीटर के क्षेत्र को निर्माण निषिद्ध क्षेत्र मानने का निर्देश दिया था। बाद के न्यायिक आदेशों में मैदानी क्षेत्र में 200 मीटर तक प्रतिबंधित क्षेत्र का भी उल्लेख है।हरिद्वार के बिशनपुर कुंडी क्षेत्र में गंगा के नजदीक कथित निर्माण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जुलाई 2026 में जिलाधिकारी को जांच और भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि गंगा किनारे निर्माणों की नियमित जांच क्यों नहीं हो रही? क्या संबंधित विभागों ने सभी निर्माणों का सीमांकन और सत्यापन कराया है? प्रशासन और एचआरडीए को शिकायतों की जांच कर अवैध निर्माण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि गंगा के प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सके।


