12 साल बाद दिखी उड़ने वाली गिलहरी,
- ( इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल)




रिपोर्ट:अरुण कश्यप
रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे रामनगर वन प्रभाग में करीब 12 वर्ष बाद दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल (विशाल उड़न गिलहरी) दिखाई देने से वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों में उत्साह है। यह दुर्लभ निशाचर जीव कोसी रेंज के टेड़ा गांव स्थित एक घर में पहुंच गया था, जहां ग्रामीणों की सूचना पर रेस्क्यू विशेषज्ञ आशीष कश्यप और राजेश कश्यप ने उसे सुरक्षित पकड़ लिया।जांच के बाद वन अधिकारियों ने इसकी पहचान इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल के रूप में की। यह पक्षी की तरह उड़ती नहीं, बल्कि आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद त्वचा की झिल्ली (पेटाजियम) की मदद से 60 से 80 मीटर तक पेड़ों के बीच ग्लाइड करती है।वन विभाग के अनुसार रामनगर क्षेत्र में इस प्रजाति का अंतिम रिकॉर्ड वर्ष 2014 में ढिकुली-गर्जिया वन क्षेत्र में मिला था। उप प्रभागीय वनाधिकारी अंकित बडोला ने बताया कि स्वास्थ्य परीक्षण के बाद गिलहरी को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा तथा इस दुर्लभ रिकॉर्ड को विभागीय अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा।वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रजाति की दोबारा मौजूदगी रामनगर के जंगलों की समृद्ध जैव विविधता और सफल संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक संकेत है।


