टिहरी विकास प्राधिकरण में विवादों के घेरे में सहायक अभियंता दिग्विजय नाथ तिवारी, गंभीर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

करोड़ों के राजस्व नुकसान, नक्शों की स्वीकृति और बैंक गारंटी से जुड़े मामलों में उठे सवाल; शासन से निष्पक्ष जांच की मांग
रिपोर्ट; मोहित प्रधान
टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में तैनात सहायक अभियंता दिग्विजय नाथ तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर विभागीय स्तर पर गंभीर सवाल उठे हैं। सितंबर 2026 में प्राधिकरण के ही एक अन्य सहायक अभियंता पंकज पाठक ने उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत भेजकर तिवारी के कार्यकाल से जुड़े कई मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए थे।शिकायत में करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान, भवन मानचित्रों की स्वीकृति, बैंक गारंटी और भूमि उपयोग से संबंधित प्रकरणों की जांच की मांग की गई है। ऐसे में सवाल है कि जब विभाग के भीतर ही गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है?
दिग्विजय नाथ तिवारी के संबंध में सामने आई जानकारी और आरोप
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिग्विजय नाथ तिवारी टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में सहायक अभियंता के पद पर तैनात हैं। सितंबर 2026 में विभागीय जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के कार्य भी उन्हें सौंपे गए थे।
*पंकज पाठक की शिकायत में निम्नलिखित प्रमुख आरोप दर्ज बताए गए हैं:*
* पार्क की भूमि पर नक्शा स्वीकृति: फाइल TSN/CR/0002/24-25 में भूमि उपयोग और मास्टर प्लान के प्रावधानों की अनदेखी का आरोप।
* 1.46 करोड़ रुपये का राजस्व: चंबा के एक प्रकरण में भू-उच्चीकरण शुल्क नहीं वसूलने का आरोप।
* 72 लाख रुपये की बैंक गारंटी: कमल कांत मलिक से संबंधित फाइल में आवश्यक बैंक गारंटी के बिना नक्शा जारी करने का आरोप।
* 2.18 करोड़ रुपये का शुल्क: कौड़ियाला के एक प्रकरण में निर्धारित शुल्क की वसूली नहीं करने का आरोप।
* मुनि की रेती होटल प्रकरण: प्रस्तावित होटल के नक्शे में भूमि उपयोग संबंधी विसंगतियों का आरोप।
अब देखना हैं कि इन बड़े स्तर के आरोपों की कब तक कोई जाँच हो पाती हैं क्योंकि सुनाने में आया कि पूर्व में भी उन पर लगाए गए कहीं गंभीर आरोपों से संबंधित शिकायती पत्र को कूड़ेदान में फेंक दिया गया है


