नंदा की चौकी सेतु प्रकरण में अभियंताओं के निलंबन का विरोध, निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग।
रिपोर्ट:अरुण कश्यप
देहरादून। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टोंस नदी पर नवनिर्मित सेतु के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के मामले में सहायक अभियंता अमित त्यागी और अपर सहायक अभियंता नवीन गैरोला के निलंबन का उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग ने विरोध किया है। संघ ने शासन से मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर वास्तविक कारणों और जिम्मेदार पक्षों का निर्धारण करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि शासन की प्रारंभिक जांच में ही डिजाइन कंसल्टेंट की तकनीकी कमियों का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार River Diversion Work के डिजाइन में नदी तल की Cross Slope और नदी की Meandering Nature को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया। साथ ही River Training के आवश्यक उपाय भी डिजाइन में उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके कारण नदी का प्रवाह एक ओर केंद्रित हुआ और सेतु के Abutment के Upstream में Heavy Scouring के चलते एप्रोच रोड की ओर भूमि कटाव हुआ।संघ ने कहा कि यदि आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य या River Training Measures का प्रावधान स्वीकृत DPR और डिजाइन में ही नहीं था, तो उसके निष्पादन के लिए अधीनस्थ अभियंताओं को सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अभियंताओं की जिम्मेदारी स्वीकृत डिजाइन, ड्राइंग और तकनीकी प्रावधानों के अनुसार कार्य की निगरानी एवं गुणवत्ता नियंत्रण तक सीमित होती है।
संघ के मुताबिक मुख्य सेतु संरचना सुरक्षित है, जबकि क्षति मुख्य रूप से एप्रोच रोड में हुई। नदी का प्रवाह सेतु के पूरे स्पान के बजाय एप्रोच रोड की ओर केंद्रित होने से कटाव हुआ और सड़क धंस गई।संघ ने डिजाइन कंसल्टेंट, River Diversion, River Training, नदी प्रवाह और Scouring सहित सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की मांग की है। साथ ही अभियंताओं का निलंबन शीघ्र वापस लेने की मांग की।
यह मांग प्रांतीय अध्यक्ष इं. सीडी सैनी, प्रांतीय महामंत्री इं. एपी सिंह, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष इं. सरीन कुमार, मंत्री इं. अमर सिंह, जनपद अध्यक्ष इं. शरद टम्टा समेत कार्यकारिणी ने की है।



