रवासन नदी के पुल पर श्रेय लेने की होड़, एक दिन पहले स्वामी यतीश्वरानंद तो अगले दिन पहुंचीं विधायक अनुपमा रावत
50 साल पुरानी मांग पूरी होने पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने, दोनों पक्षों ने अपने प्रयासों को बताया अहम
रिपोर्ट: अरुण कश्यप
हरिद्वार। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में रवासन नदी पर प्रस्तावित पैदल पुल की वित्तीय स्वीकृति के बाद अब इसका श्रेय लेने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद सोमवार को लालढांग क्षेत्र में धरनास्थल पर पहुंचे, जबकि मंगलवार को विधायक अनुपमा रावत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पैदल मार्च निकालकर पुल की स्वीकृति पर खुशी जताई। दोनों पक्षों के दावों के बीच करीब 50 साल से पुल की मांग कर रहे क्षेत्रवासियों को अब निर्माण शुरू होने का इंतजार है।रवासन नदी पर रसूलपुर, मंगोलपुरा, आर्यनगर और लालढांग क्षेत्र को जोड़ने के लिए 250 मीटर लंबे पैदल स्टील ट्रस पुल के निर्माण को शासन ने ₹9 करोड़ 12 लाख 40 हजार की वित्तीय स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा संख्या 1038/2021 के तहत स्वीकृत इस परियोजना की अनुमानित लागत 934.07 लाख रुपये बताई गई है। शासन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र के बाद पुल निर्माण का रास्ता साफ हुआ है।
सोमवार को स्वामी यतीश्वरानंद ने रसूलपुर पहुंचकर शासनादेश को क्षेत्रवासियों के बीच पढ़वाया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री रहते हुए उन्होंने पुल का प्रस्ताव दिया था और मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि विधायक दूसरी पार्टी की होने के बावजूद क्षेत्र में विकास कार्य जारी रहेंगे।
वहीं, मंगलवार को विधायक अनुपमा रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लालढांग स्थित कैंप कार्यालय से गांधी चौक तक पैदल मार्च निकाला और मिठाई बांटकर खुशी जताई। अनुपमा रावत ने भाजपा पर श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2022 में विधायक बनने के बाद उन्होंने पुल निर्माण के लिए प्रयास किए। उनके अनुसार वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद शासनादेश जारी हुआ।
कांग्रेस प्रदेश सचिव गुरजीत सिंह लहरी ने भी भाजपा पर विकास कार्यों का श्रेय लेने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, स्वामी यतीश्वरानंद अपने प्रयासों को स्वीकृति का आधार बता चुके हैं।
अब राजनीतिक दावों से इतर क्षेत्रवासियों की निगाहें पुल के निर्माण कार्य पर टिकी हैं।


