उत्तराखंड में अवैध प्लॉटिंग पर बड़ा एक्शन, 10 वर्षों का पूरा रिकॉर्ड तलब; सभी विकास प्राधिकरणों को शासन का आदेश।
रिपोर्ट अरुण कश्यप
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर में अवैध प्लॉटिंग पर शिकंजा कसते हुए सभी विकास प्राधिकरणों से पिछले 10 वर्षों का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। आवास विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा जारी आदेश में प्रदेश के सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के साथ मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।शासन के निर्देशानुसार प्राधिकरणों को बीते दस वर्षों में अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ जारी किए गए सभी नोटिसों का विवरण उपलब्ध कराना होगा। इसमें प्रत्येक मामले का स्थान, खसरा संख्या, नोटिस संख्या और नोटिस जारी करने की तिथि सहित पूरी जानकारी देनी होगी। इसके अलावा संबंधित भूमि का मास्टर प्लान में निर्धारित भूमि उपयोग (लैंड यूज) भी स्पष्ट रूप से बताना होगा।आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में बाद में प्लॉटिंग या ले-आउट प्लान को स्वीकृति दी गई है, उनकी सूची और स्वीकृति का पूरा विवरण भी भेजा जाए। साथ ही उन प्लॉटिंग क्षेत्रों में व्यक्तिगत भूखंडों पर स्वीकृत भवन मानचित्रों का भी विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।शासन ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि मांगी गई सूचनाएं एक सप्ताह के भीतर संयुक्त मुख्य प्रशासक, उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण को भेजी जाएं तथा उसकी एक प्रति शासन को भी उपलब्ध कराई जाए। संयुक्त मुख्य प्रशासक को सभी प्राधिकरणों से जानकारी संकलित कर हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।माना जा रहा है कि इस कवायद के जरिए राज्य में अवैध प्लॉटिंग, मास्टर प्लान के उल्लंघन और नियमों के विपरीत दी गई स्वीकृतियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके आधार पर भविष्य में अवैध कॉलोनियों और अनियमित निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो सकता है।
- क्या कहते हैं hrda के अधिकारी
हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के अधीक्षण अभियंता राजन कुमार ने बताया कि अब हम लोगों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है निर्धारित तय सीमा में सभी सूचनाओं उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दी जाएगी


