वीकेंड पर हरिद्वार जाम से बेहाल, तपती धूप में घंटों फंसे श्रद्धालु,
रिपोर्ट: अरुण कश्यप
हरिद्वार। वीकेंड पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी आमद के चलते शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। हर की पौड़ी, अपर रोड, भीमगोड़ा, सिंहद्वार और आसपास के प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगने से लोगों को घंटों तक वाहनों में फंसे रहना पड़ा।भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच जाम में फंसे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हर की पौड़ी और गंगा घाटों तक पहुंचने में सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक समय लग रहा है। वाहनों की लंबी कतारों के कारण कई स्थानों पर यातायात रेंग-रेंग कर चलता नजर आया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस लगातार यातायात संचालन में जुटी रही। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण जाम की समस्या बनी हुई है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने तथा यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रह सके।
हरिद्वार में जाम की बड़ी वजह बनी धीमी यातायात गति, ट्रैफिक विज्ञान को समझना जरूरी ।
हरिद्वार में लगातार बढ़ती यातायात समस्या और लंबे जाम के पीछे केवल वाहनों की संख्या ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इसके पीछे ट्रैफिक विज्ञान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी हाईवे पर वाहन सामान्यतः 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति से चलते हैं, जिससे यातायात का प्रवाह सुचारु बना रहता है और वाहनों की कतारें नहीं बनतीं।
हालांकि जब यही ट्रैफिक किसी संकरी सड़क, तिराहे, चौराहे या बाधित मार्ग पर पहुंचता है तो वाहनों की गति घटकर 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी कम हो जाती है। गति में यह अचानक कमी यातायात के प्रवाह को प्रभावित करती है और पीछे आने वाले वाहनों की लंबी कतारें बनने लगती हैं। धीरे-धीरे यह स्थिति जाम का रूप ले लेती है और वाहन रेंग-रेंग कर आगे बढ़ते हैं।
हरिद्वार में भी प्रमुख मार्गों, तिराहों और संकरे हिस्सों पर यही स्थिति देखने को मिलती है। धार्मिक पर्यटन, चारधाम यात्रा और स्थानीय यातायात का दबाव बढ़ने से समस्या और गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क चौड़ीकरण, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और वैकल्पिक मार्गों के विकास से ही शहर को जाम की समस्या से स्थायी राहत मिल सकती है।





